{"product_id":"aravali-bharat-ki-jeevan-rekha-nyayik-vaigyanik-drishtikon-aur-paryavaran-sanrakshan-अरावली-भारत-की-जीवन-रेखा-न्यायिक-वैज्ञानिक-दृष्टिकोण-और-पर्यावरण-संरक्षण","title":"Aravali: Bharat Ki Jeevan-Rekha : Nyayik, Vaigyanik Drishtikon Aur Paryavaran Sanrakshan - अरावली : भारत की जीवन-रेखा : न्यायिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण संरक्षण","description":"\u003cp class=\"PDq2pG_selectionAnchorContainer\"\u003e\u003cstrong\u003eअरावली : भारत की जीवन-रेखा — न्यायिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण संरक्षण\u003c\/strong\u003e अरावली पर्वत-तंत्र के संरक्षण, पारिस्थितिक महत्व और वर्तमान चुनौतियों को न्यायिक, वैज्ञानिक तथा पर्यावरणीय दृष्टि से समझने वाली एक संदर्भपरक पुस्तक है। इसमें न्यायिक निर्णयों और वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से अरावली की वास्तविक पारिस्थितिक पहचान को समझने का प्रयास किया गया है। \u003cspan class=\"contents\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"PDq2pG_selectionAnchor\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक जल, मृदा, भूजल, वन, जैव-विविधता, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों के जीवन में अरावली की भूमिका को सामने लाती है। साथ ही, खनन और विकास से उत्पन्न पर्यावरणीय दबाव, भूमि एवं पारिस्थितिकी पर उनके प्रभाव तथा क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करती है। \u003cspan class=\"contents\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसका एक महत्वपूर्ण पक्ष अरावली की पहचान से जुड़े न्यायिक और वैज्ञानिक प्रश्नों का विश्लेषण है। पुस्तक 100 मीटर स्थानीय उभार और 500 मीटर जैसे मानचित्रण मानदंडों की चर्चा करते हुए बताती है कि अरावली जैसे व्यापक पारिस्थितिक तंत्र को केवल एक संख्यात्मक कसौटी से नहीं समझा जा सकता। भूविज्ञान, मृदा, जल, जैव-विविधता, भूमि उपयोग और भू-दृश्य संपर्कता को भी साथ लेकर देखने की आवश्यकता है। \u003cspan class=\"contents\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक विज्ञान, कानून और जनभागीदारी के समन्वय के माध्यम से अरावली को जल-सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा प्रस्तुत करती है। पर्यावरण अध्ययन के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, पर्यावरणविदों, जल-संरक्षण कार्यकर्ताओं, नीति एवं कानून में रुचि रखने वाले पाठकों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को समझने वाले सामान्य पाठकों के लिए यह उपयोगी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Natals Publication","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48998493946009,"sku":"NAT-ARV-3074-26","price":280.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0724\/4913\/0649\/files\/WhatsAppImage2026-09-07at19.05.08.jpg?v=1788964146","url":"https:\/\/natals.in\/products\/aravali-bharat-ki-jeevan-rekha-nyayik-vaigyanik-drishtikon-aur-paryavaran-sanrakshan-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3","provider":"Natals Publication","version":"1.0","type":"link"}